सामाजिक अभियान का प्रभाव रिक्शा वालों की ज़िंदगी बदल सकता है
समाज का अटूट हिस्सा होने केकारण ,हम सभी की यह ज़िम्मेदारी बनती है की किसी न किसी तरह अपना कर्तव्य निभाएं।
क्या यह सोच सही है?
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समाज का अटूट हिस्सा होने केकारण ,हम सभी की यह ज़िम्मेदारी बनती है की किसी न किसी तरह अपना कर्तव्य निभाएं।
क्या यह सोच सही है?