प्यार , करुणा , हमदर्दी , मदद सभी की आशाएँ होती हैं

क्या हमारी मंज़िले हमें इंसानियत के रास्ते पर पहुंचा सकती हैं ? यह तो आज की दुनिया में संभव ही नहीं लगता !