यह होता है उन लोगों के साथ जो साजिद खान की फिल्में देखते हैं

फिल्में तो हम सब देखना चाहते हैं मगर टार्चर से भरी फिल्में कोई नहीं देखना चाहता। काश ये बात साजिद खान को समझ आ जाती।