दर्दनाक ना हो यह दिवाली,ऐसा क्या हो गया इनके साथ
सारे ग़मों को भुलाकर दिवाली मनाई जाती है। दिवाली एक नई सुबह का आगाज़ है। क्या हम मिल-जुलकर इस नै सुबह को संभाल कर रख पाएंगे?
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सारे ग़मों को भुलाकर दिवाली मनाई जाती है। दिवाली एक नई सुबह का आगाज़ है। क्या हम मिल-जुलकर इस नै सुबह को संभाल कर रख पाएंगे?