ग़रीबों को मार डालो - एक शॉकिंग सोशल एक्सपेरिमेंट !
लगता है इनसानियत नाम की चीज़ ख़त्म हो गई है। इनसानियत केवल नाम मात्र एक शब्द बनकर रह गई है। हमें गुस्सा तो आता है पर हम मदद नहीं करना चाहते। हम बड़े बनने का दिखावा तो करते हैं पर बड़प्पन क्या है हमें पता नहीं।
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