परिनीति के गुस्से के आगे जर्नलिस्ट हो गया फुस

वाकई में जो परिनीति ने जो कहा वह सही है। लोगों को बहुत  सीखने और समझने की ज़रूरत है। ना जाने अच्छे दिन कब आएंगे।