गरीबी की मार ,छीन लेती है घरौंदा गरीब का
तकनीक, तरक्की, और ज्ञान इतना आगे बढ़ गए हैं कि इनकी चकाचौंध रौशनी ने हमें अंधा कर दिया है।
हम समाज में रहते हुए भी सामाजिक नहीं रहे। हमारी काबिलियत चार पैसों तक सीमित हो गयी है।
दूसरों कि मदद के नाम पर हम मज़ाक करते हैं।
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